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Tribal protest against acquisation of land for cement factory


INDORE: Up in arms against land acquisition, farmers from nearly 27 villages, mostly tribal, of Manavar Tehsil of Dhar district on Thursday protested against the acquisition of their land for the proposed cement plant and raised issue related to legality of the project.

Tribal alleged that even after submitting hundreds of applications to officials and local representatives they did not get satisfactory reply. On Thursday hundreds of villagers took out the rally at Main Street of Manavar and reached the SDM office and demanded to clear the stand of government over land acquisition.

Meera of Narmada Bachao Andolan (NBA) alleged that as per the rule to set up any project they need to get approval from the people of the area, here in this case Gram Sabha had passed a resolution opposing the proposed cement factory. “They even fail to produce documents related to approval from Ministry of Environment and Forest for the project and they don’t even have approval from the planning commission,” alleged Meera.

The plant, which is proposed in the scheduled adivasi area is being strongly challenged by the local adivasis – farmers, as thousands of them will be displaced and affected for the plant, its mines and by expansion, pollution activities. All the villages to be affected are in the command area of the Maan Dam of NVDA and the land is fully irrigated.

Chhagan Bhilala, resident of Manawar alleged that dam water meant for rural irrigation is being diverted for the industrial purpose.

Prashant Patidar, who was part of the protest said why fresh acquisition of land is being carried out which will displace hundreds of people, when hundreds of acre of land acquired for Dhar Cement is lying vacant. “The vacant land should be given for the new cement factory instead of acquiring fresh land,” he said.

Meera even raised question over the validity of the project saying that state government has signed a memorandum of understanding with the company for cement plant in October 2010 at Khajuraho Global Investor meet. The validity of the MoU was for three years. She claimed that project has lapsed and even then government is going ahead with the project. “There is no document to show that time period of MoU has been extended,” she said.

Protestors also demand that after the passing of new Land Acquisition Act 2013 all the process of land acquisition should be done under the new law. They alleged that administration is trying to acquire land under the old land acquisition act on the pretext that project was announced and notices for land acquisition was issued before the enforcement of new land acquisition act.

Web: http://timesofindia.indiatimes.com/city/indore/Tribal-protest-against-acquisation-of-land-for-cement-factory/articleshow/30157062.cms?referral=PM

 
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नर्मदा का नरमदा प्रसाद


नर्मदा का नरमदा प्रसाद

Author:

विमल भाई

Source:

माटू जनसंगठन

वर्ष 2012 में नर्मदा बचाओ आंदोलन ने ओंकारेश्वर बांध और इंदिरा सागर बांध के विस्थापितों के सवालों पर जल सत्याग्रह किया था। ओंकारेश्वर में सरकार ने मांगे मानी और दूसरी तरफ इंदिरा सागर में आंदोलनकारियों पर दमन किया गया। दसियों दिनों से पानी में खड़े लोगों को जेल में डाला गया। ओंकारेश्वर में जो मांगे मानी गर्इ, पूरा उन्हें भी नहीं किया। 1 सिंतबर, 2013 को पूरा जल सत्याग्रह का इलाक़ा पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। पुनर्वास नहीं, ज़मीन नहीं, जो पैसा दिया भी गया वो भी इतना कम की स्वयं से शर्म आ जाए।पानी गरम था और पैर के नीचे चिकनी, मुलायम, धंसती, सरकती मिट्टी। इसी में से चलकर अंदर गंदे भारी पानी में लगभग 20 गाँवों के प्रतिनिधियों के रूप में महिला पुरूष बैठे थे। पीछे बैनर था नर्मदा बचाओ आंदोलन, ज़मीन नहीं तो बांध खाली करो। जोश के साथ नारे लग रहे थे, लड़ेंगे-जीतेंगे, वगैरह-वगैरह। जो नारे नर्मदा से निकले और देश के आंदोलनों पर छा गए थे ये जगह अजनाल नदी के किनारे नहीं बल्कि अजनाल के रास्ते इंदिरा सागर बांध में रुके नर्मदा के पानी की है। अजनाल के किनारे का टप्पर अब इंदिरा सागर बांध के जलाशय के किनारे आ गया है खेती-पेड़ सब डूबे हैं। यहां नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेतृत्व में जल सत्याग्रह चालू है। म.प्र. के तीन जिलों में इंदिरा सागर का जलाशय फैला है, खंडवा, देवास और हरदा के 213 गाँवों को डुबोया है। 2005 में चालू हुए बांध ने अब तक 3000 हजार करोड़ का फायदा दिया है और लगभग इतना ही पैसा बांध विस्थापित लोगों के पुनर्वास, अनुदान आदि के लिए चाहिए। 41 और गाँवों मे डूब आ रही है। इस क्षेत्र में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सर्वे को म.प्र. शासन ने रोक दिया। पर डूब तो आ गर्इ।

हरदा से लगभग 26 कि.मी. दूर बिछौलागांव, फिर वहां से जल सत्याग्रह स्थल 5 कि

25 कि.मी. तक कोर्इ 11-12वीं के लिए कोर्इ विद्यालय नहीं जिनकी बच्चियां इसी कारण पढ़ नहीं पातीं उनके साथ ही ऐसा क्यों?

प्रदेश में मुख्यमंत्री जी की ‘जनआर्शीवाद यात्रा’ चालू है और जिस दिन 12 सितंबर को हम हरदा जिले के टप्परगांव में जल सत्याग्रह में पहुंचे थे उसी दिन स्थानीय विधायक जी भी इस यात्रा को लेकर आगे बढ़ रहे थे उन्हें केले में तौला गया था वे तेदूं पत्ता मज़दूरों को बोनस भी बांट रहे थे। पर हजारों की जिंदगियों के लिए मौन। लोग इस चुनावी खेल से परिचित लग रहे थे। तीनों जिलों में आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता जलसत्याग्रह चला रहे हैं सब छोड़कर वहीं जमें हैं गाँवों से लोग आते हैं। आगे की रणनीति बढ़ती है। गाँवों में गणेश जी की स्थापना व कीर्तन भी है।

हरदा, देवास, खंडवा जिले में पहले दिन करीब 600 जल सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया। लोगों के लिए ये सत्याग्रह आंदोलन जेल साल भर के त्यौहार जैसे ही है। वे हंसते-हुए कष्ट सहते हैं पर लड़ार्इ नहीं छोड़ते। यदि छोड़ी तो आगे की पीढ़ी के लिये भुखमरी ही रहेगी। लड़ेगे-जीतेंगे-बढ़ेगे।
.मी. था से हम जंगल होते हुए हनीफाबाद टोला पहुंचे थे। जहां लोग खाना खा रहे थे पेड़ के नीचे नरमदा प्रसाद भी था दोनों पैर अशक्त है तीन पहिए की साइकिल पर, साथ के बच्चे उसे धकेल कर पानी में जाते हैं। सिरालिया गांव में अपना मकान बांध में डूबा चुका नरमदा प्रसाद हर महीने सरकार से 150 रु. पाता है। आदिवासी है। मन में जोश है उसका शरीर उतना सहयोग नहीं देता है। पर हक की लड़ार्इ है। पूछता है 150 रु0 में क्या होता है? बिछौला गांव की कृष्णाबार्इ जिसे बरसों से देखा है दुबली-पतली गहरे रंग की? प्रशासन की आंख में किरकिरी है। अपना पैर दिखा रही थीं। पैर में पिछले साल पानी में खड़े होने के कारण एग्ज़ीमा हो गया है। कितने ही और महिला-पुरूषों के पैर सड़ गए थे। एक महिला को आंखों से दीखना काफी कम हो गया है। जलाशय का पानी घरों तक आ गया है। कर्इ बच्चे पिछले वर्षों में डूबकर, फंसकर मर गए हैं। तो अब करे भी तो क्या करें। सिवाए अहिंसात्मक संघर्ष के नए-नए आयामों को लेकर आगे बढ़ना। सरकार तोसिर्फ प्रचार कर रही है कि बांध से हजारों करोड़ कमाया। पर कमाया कैसे? जब आप पुनर्वास पर्यावरण के खर्चों को ही समाप्त कर देंगे तो आपका फायदा तो स्वत: ही बढ़ा हुआ दिखेगा।

वर्ष 2012 में नर्मदा बचाओ आंदोलन ने ओंकारेश्वर बांध और इंदिरा सागर बांध के विस्थापितों के सवालों पर जल सत्याग्रह किया था। ओंकारेश्वर में सरकार ने मांगे मानी और दूसरी तरफ इंदिरा सागर में आंदोलनकारियों पर दमन किया गया। दसियों दिनों से पानी में खड़े लोगों को जेल में डाला गया। ओंकारेश्वर में जो मांगे मानी गर्इ, पूरा उन्हें भी नहीं किया। 1 सिंतबर, 2013 को पूरा जल सत्याग्रह का इलाक़ा पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। कृष्णाबार्इ ने बताया हम 1 सिंतम्बर को उंवागांव में बैठे तो पुलिस ने बैठने नहीं दिया गिरफ्तार करके हरदा ले गए। दूसरी टुकड़ी बिछौला गांव में पानी में बैठ गर्इ उसे भी 2 तारीख को पुलिस हरदा जेल ले गर्इ। 2 सितम्बर को हनीफाबाद टोला में भी लोग बैठ गए 3 सितम्बर को पुलिस ने उन्हें पानी में से निकालकर दूर बाहर करके छोड़ दिया। 7 सितम्बर से लोग दुबारा बैठे। तब से लगातार बैठे हैं इस बार पुलिस नहीं आर्इ। सरकार समझ गर्इ है कि लोग नहीं मानेंगे।
इंदिरा सागर बांध डूब क्षेत्र में आने वाली अपनी जमीन के विरोध में जल सत्याग्रह करते स्थानीय निवासीनर्मदा बचाओ आंदोलन की सशक्त महिला नेता चित्तरूपा पलित को इस बार जल सत्याग्रह के शुरूआती दिनों में ही पुलिस घसीट कर उठा लिया था। 9 दिनों बाद इंदौर की जेल से छूटी। वो कहती हैं पुलिस से कोर्इ लड़ार्इ नहीं है। उस पर सैंकड़ों मुकदमे हैं। लंबे उपवासों के दौर झेले हैं। वो सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावितों के हक के लिए भी आंदोलन केस स्वयं लड़ती हैं। ‘लाठी गोली खाएंगे आगे बढ़ते जाएंगे’ आंदोलन का नारा है। आंदोलन को तोड़ने के लिए 144 धारा का इस्तेमाल करना पुराना तरीका होता है जिसका इस्तेमाल खूब हुआ पर लोगों की नर्इ-नर्इ टुकड़ियां कमान संभालती गर्इ। बिछौला में खुद उपजिलाधिकारी हरदा ने मार्इक से घोषणा की आप लोग पानी में से निकल आओ नही ंतो ज़बरदस्ती करेंगे। कृष्णाबार्इ बता रही थीं कि ”हमने पूछा हमारा अपराध बताओ? तो उनके पास जवाब नहीं था। पुलिस ने चारों तरफ से घेरा और बाहर किया। हम डरते नहीं हैं।” यहां जबर मारे और रोने ना दे की कहावत चरितार्थ होती है।

पुनर्वास नहीं, ज़मीन नहीं, जो पैसा दिया भी गया वो भी इतना कम की स्वयं से शर्म आ जाए। दस छोटी व साल भर बहने वाली नदियां नर्मदा में मिलती है। तवा, गंजाल, अजनाल, मायक, कालीमायक, सियाड़, छोड़ापछाड़, रूपारेल, अगिन, भामसुक्ता। किसी में बैकवाटर सर्वेक्षण नहीं हुआ। नतीजा हुआ की घर डूबे तो कहीं खेत, किसी का घर नापा पर खेत छोड़ा जबकि वो उसी सीध में है। पूरा सर्वे ही अपने में एक उलझी सी ऊन है। सभी नदियों के किनारे गाँवों का नक्शा बहुत अजीब हो गया है पानी कहीं से भीआने की बात है वैसे सर्वेक्षण पर भरोसा भी नहीं। पूरे देश से लेकर नर्मदा में भी यह नया नहीं है चाहे वो तवा बांध हो या बरगी बांध जिसमें 101 गांव का सर्वे था और डूबे 162 गांव। लोग सोते रहे और उनके घरों में पानी आ गया था। बिछौला गांव की लाड़की बार्इ की 19 में से 10 एकड़ ज़मीन डूबी, कुआं, 50 सागौन के पेड़, आम के अनेक पेड़। मिला सिर्फ 4 लाख रु. ज़मीन का और 1700 रु. पेड़ों का।

”अपने ही खेत में उगे पेड़ जब हम मांगते थे अपने मकान में लगाने के लिए, तो नहीं मिलते थे। अब हमारे सामने ही सारे पेड़ काटकर सरकार ले गर्इ। घर के दरवाज़े से 5 मीटर की गली के पार वाला मकान डूब में लिया है यानि पानी वहां आया तक क्या होगा?” यहां की धरती खूब उपजाऊ है गेहूं, मूंग, चना, सोयाबीन की फसलें मुख्य हैं। जल सत्याग्रह में बैठे भरत गुर्जर ने कहा कि हम सब अब मज़दूर ही हो गए हैं। जमीनें तो गर्इं। उसके चेहरे का दर्द ज़मीन बदले-ज़मीन की मांग की जरूरत बता रहा था। इसकेसाथ उसने भारत के राष्ट्रपति जी का 18 जुलार्इ को ”एसएमएस पोर्टल” के आरंभ के अवसर पर भेजा एसएमएस दिखाया। उसमें लिखा था ”मानसून खुशहाली लाएगा, खाद्य सुरक्षा लाएगा।” भैया हमारी तो जमीनें डूब गर्इ हैं मानसून में बिना ज़मीन कौन सी खाद्य सुरक्षा?

इंदिरा सागर बांध डूब क्षेत्र में आने वाली अपनी जमीन के विरोध में जल सत्याग्रह करते स्थानीय निवासीआलोक अग्रवाल कानपुर आर्इआर्इटी से पढ़े हैं। नर्मदा के बांधों और विस्थापितों के हक के लिए लड़ रहे हैं। कहते हैं कोर्ट से ज़मीन का मसला तय होगा पर सरकार जो कर सकती है वो तो करे। मध्य प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने वाले है। लोग देखेंगे। पर हमारी लड़ार्इ तो लंबी है। थोड़ा-थोड़ा करके ही आगे कुछ होता है। उतराखंड आपदा के समय तीर्थयात्रियों के लिए प्रदेश मुख्यमंत्री बहुत चिंतित थे, उनके दुख में द्रवित थे। 2011 में दस हजार एकड़ भूमि गो-संवर्धन के लिए सहारा कंपनी को दिए। गौ माता के लिए चिंतित मुख्यमंत्री जी उनके लिए भूमि की आवश्यकता बतार्इ। बात गले नहीं उतरती आदिवासी व समृद्ध किसानों की ज़मीनें हजारों गाँवों में फैली हैं सरकार ने उनकी ज़मीन छीनी जिसे जिंदगी छीनना ही कहा जाएगा। किसानों के पास 25 कि.मी. तक कोर्इ 11-12वीं के लिए कोर्इ विद्यालय नहीं जिनकी बच्चियां इसी कारण पढ़ नहीं पातीं उनके साथ ही ऐसा क्यों?

प्रदेश में मुख्यमंत्री जी की ‘जनआर्शीवाद यात्रा’ चालू है और जिस दिन 12 सितंबर को हम हरदा जिले के टप्परगांव में जल सत्याग्रह में पहुंचे थे उसी दिन स्थानीय विधायक जी भी इस यात्रा को लेकर आगे बढ़ रहे थे उन्हें केले में तौला गया था वे तेदूं पत्ता मज़दूरों को बोनस भी बांट रहे थे। पर हजारों की जिंदगियों के लिए मौन। लोग इस चुनावी खेल से परिचित लग रहे थे। तीनों जिलों में आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता जलसत्याग्रह चला रहे हैं सब छोड़कर वहीं जमें हैं गाँवों से लोग आते हैं। आगे की रणनीति बढ़ती है। गाँवों में गणेश जी की स्थापना व कीर्तन भी है।

हरदा, देवास, खंडवा जिले में पहले दिन करीब 600 जल सत्याग्रहियों को गिरफ्तार किया गया। लोगों के लिए ये सत्याग्रह आंदोलन जेल साल भर के त्यौहार जैसे ही है। वे हंसते-हुए कष्ट सहते हैं पर लड़ार्इ नहीं छोड़ते। यदि छोड़ी तो आगे की पीढ़ी के लिये भुखमरी ही रहेगी। लड़ेगे-जीतेंगे-बढ़ेगे।

(जनआंदोलनो का राष्ट्रीय समंवय की ओर से विमलभार्इ, राष्ट्रीय संगठक और बिलाल खान समंवय के साथी जल सत्याग्रह में समर्थन देने गए थे। वही से लौटकर विमलभार्इ का लेख।)

Modi’s political silence in Badwani, M. P. Exposes fake claims of ‘free power’ and ‘full rehabilitation’


For Immediate Release                 22ndNovember, 2013                                                                                                            

 

Modi’s political silence in Badwani, M. P.

Exposes fake claims of ‘free power’ and ‘full rehabilitation’

 

Mr. Narendra Modi, for the first time, in his political career, held a public meeting at Badwani, in the electoral campaign for the BJP in Madhya Pradesh. Badwani, being the centre of the Narmada Bachao Andolan since the last 28 years and Mr. Modi having taken up the issue of Sardar Sarovar Dam, as a campaign from Gujarat to Maharashtra and Madhya Pradesh, the entire country waited to watch what Mr. Modi would say or would not ! Thousands of adivasis, farmers, labourers, fish workers and others from the valley were also watching and waiting to know what statement he would make by raising a forum in the valley itself. They were also ready to stand up and react to anything that Modi was expected to state on Sardar Sarovar Dam, at the cost of their rights and life. Mr. Modi however did not give them this opportunity as he showed no courage to repeat the lies at the valley he uttered at Bhopal or at the Sardar Patel statue inauguration at Kevadia. Thus, all his lies of free power and full rehabilitation were proved to be as fake, since he did not display the guts to repeat his lies ! He was speechless on the issue on the issue of Narmada, he only vaguely referred to ‘development’ with no ideological content as usual and trying to blame ‘unknown forces’ for stalling the same.While the people certainly missed an opportunity to question him, as he flew away within half an hour, the situation brings forth that the real people’s power matters much more than the Modi-political power. The non-violent, non-electoral politics of social movements too can make a difference, we assert.

It was during his public meetings first in Pune and then at Bhopal that he had very confidently claimed that these two states would receive 400 MW and 800 MW of ‘free power’ from the Sardar Sarovar Dam. NBA had promptly challenged this falsehood and the claim that the UPA Government was not permitting the dam height to be raised, stalling the progress of the state of Madhya Pradesh and that the Chief Minister of Maharashtra is proving to be week by not giving consent to further construction, till rehabilitation. Modi also did not answer any questions that the NBA raised on the eve of his meeting. His false promise of lighting up the whole of Madhya Pradesh if the dam could be raised from 110 to 100 mts, voiced in 2005 from a similar public meeting at Anjad, a township adjacent to the submergence area obviously stood exposed.

Without any facts and figures, he was making such baseless claims only to promote his party with an eye on the vote bank, not only in Madhya Pradesh for the upcoming elections, but also the 2014 elections and his prime ministerial candidature. Even the congress as an opposition party in the state, with only Mr. Harish Rawat as an exception, could not exhibit its strength and courage to challenge Mr. Modi on the issue of Narmada, with huge scale of displacement of thousands of families due to not just Sardar Sarovar, but tens of other dams in the alley, affecting lakhs of adivasi, farmers and others, inspite of there being a solid vote bank, the task fell upon the NBA.

NBA, following its unique way of intervening into electoral politics adopted since 1990, in the Sardar Sarovar affected region of Maharashtra and Madhya Pradesh, organized mass Lok Manch inviting the candidates at two places at Badwani and Dharampuri, covering 5 electoral constituencies. Most of the candidates belonging to the Congress, BJP (Kukshi) CPI, NCP, Independents had turned up in Badwani, while both the mainstream parties, BJP and Congress avoided the programme in Dharampuri. The voter-citizens and the long term agitators  are obviously upset with those who did not turn up and are also knowledgeable of the push and pull applied to the Sardar Sarovar Dam without any sensitivity and concern for the displaced, for the nature. It was therefore, obviously known to the parties that their votes are going to affected and decided by their opposition or negligence to the people’s struggle on their rights. Will Modi ever be ready for an open debate on what is true development? NBA appeals to all political parties to come forward and hold an ideological debate with the people’s movements, rather than showing lollipops of smart phones to washing machines and laptops.

Saavabehan                Devram Kanera                     Kailash Awasya          Medha Patkar         

इंदिरा सागर बांध क्षेत्र में 3 जिलों में 6 जगह होंगें लोकमंच प्रत्याशियों को बतानी होगी विस्थापितों के मुद्दों पर अपनी भूमिका


नर्मदा बचाओ आन्दोलन

           2] साईं नगर, माता चौक, खंडवा (म.प्र.)

      फोन: 0733-2228-318; 9009710068

      E-mail : nbakhandwa@gmail.com

प्रेस विज्ञप्ति, 13 नवम्बर, 2013

 

विधान सभा चुनाव

इंदिरा सागर बांध क्षेत्र में 3 जिलों में 6 जगह होंगें लोकमंच

प्रत्याशियों को बतानी होगी विस्थापितों के मुद्दों पर अपनी भूमिका

आगामी विधान सभा चुनाव के पूर्व इंदिरा सागर प्रभावितों ने नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत  खंडवा, हरदा और देवास जिलों में 6 जगह लोक मंच कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है. मान्धाता, हरसूद, हरदा, खातेगांव और बागली विधान सभा सीटों के क्षेत्र में यह लोकमंच 16 नवम्बर से 21 नवम्बर तक आयोजित किये जायेंगे. इन लोकमंचो में बड़ी संख्या में विस्थापित एकत्र होकर सभी प्रत्याशियों को आमंत्रित कर उनसे विस्थापितों के पुनर्वास के मुद्दे पर संकल्प और शपथ पत्र माँगा जायेगा.

उल्लेखनीय है कि इंदिरा गत 20 वर्षों में नर्मदा घाटी में बन रहे विशालाकाय इंदिरा सागर समेत अन्य बांधों से विस्थापित होने वाले हजारों लाखों प्रभावितों के साथ ऐतिहासिक अन्याय हुआ है. इंदिरा सागर बांध में देश का सबसे बड़ा और सबसे बुरा विस्थापन किया गया है जहाँ लोगों की बिजली व् पानी काटकर, बुलडोज़र से एव् पुलिस खड़ा करके लोगों को अपने हाथों से खुद के घरों को तोड़ने के लिए मजबूर किया गया और हजारों को बिना पुनर्वास और मुआवजा डूबा दिया गया. जमीन के बदले जमीन और न्यूनतम 2 हेक्टेयर जमीन की नीति होने के बावजूद एक भी प्रभावित को जमीन नहीं दी गयी जिस कारण किसान भूमिहीन बन गया. स्वंय सरकारी आंकड़े बताते हैं कि लगभग 90% विस्थापित किसान कोई जमीन नहीं खरीद पाए दूसरी ओर मजदूर पूरी तरह बर्बाद हो गए. आज वर्षो बाद भी इंदिरा सागर विस्थापितों को पुनर्वास के अधिकार नहीं मिले हैं और ये विस्थापित बेरोजगार और बेइज्जत होकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.

कैसे होगा लोकमंच

विस्थापितों द्वारा नर्मदा बचाओ आन्दोलन के तहत आयोजित इस लोक मंच का आयोजन सम्पूर्ण निष्पक्षता के साथ किया जायेगा. लोक मंच के आयोजन में निम्न नियमों का कड़ाई से पालन किया जायेगा :

  • लोक मंच सभा स्थल पर किसी भी प्रत्याशी/दल का कोई झंडा या बैनर नहीं लगेगा.
  • लोक मंच की करवाई के दौरान किसी भी प्रत्याशी/दल के पक्ष या विरोध में कोई नारा नहीं लगाया जायेगा.
  • प्रत्याशी अपने वक्तव्य को विस्थापितों द्वारा उठाये गए मुद्दों पर केन्द्रित रखेंगे.
  • लोक मंच का सञ्चालन आयोजनकर्ता द्वारा चयनित एक समिति द्वारा किया जायेगा.

लोकमंच कार्यक्रम

 

इंदिरा सागर क्षेत्र में लोक मंच कार्यक्रम निम्न प्रकार है:

विधान सभा क्षेत्र : खातेगांव  स्थान: ग्राम मेल-पिपलिया   दिनांक : 16.11.13   समय: दोपहर 2 से 5 बजे

विधान सभा क्षेत्र : बागली   स्थान: सतवास पुनर्वास स्थल दिनांक : 17.11.13  समय: दोपहर 12 से 3 बजे

विधान सभा क्षेत्र : मान्धाता स्थान: ग्राम नंदाना          दिनांक : 18.11.13  समय: दोपहर 12 से 3 बजे

विधान सभा क्षेत्र : हरदा    स्थान: ग्राम उंवा            दिनांक : 19.11.13   समय: दोपहर 12 से 3 बजे

विधान सभा क्षेत्र : मान्धाता स्थान: ग्राम मालूद          दिनांक : 20.11.13  समय: दोपहर 12 से 3 बजे

विधान सभा क्षेत्र : हरसूद   स्थान: ग्राम दगडखेडी        दिनांक : 21.11.13  समय: दोपहर 12 से 3 बजे

इसी प्रकार महेश्वर, अपर बेदा, मान व् बरगी बांधों के क्षेत्र में भी लोक मंचों का आयोजन किया जा रहा है.

 

किन मुद्दों पर होगा लोकमंच

लोक मंच कार्यक्रम के दौरान इंदिरा सागर प्रभावितों की निम्न मांगों पर प्रत्याशियों के संकल्प के साथ शपथ पत्र माँगा जायेगा :

 

v  वह एक ऐसे देश के निर्माण के लिए, जहाँ संविधान की भावना के अनुरूप धर्म, जाति, सम्प्रदाय या लिंग के आधार पर कोई भेद नहीं होगा और किसान-मजदूरों का सम्मान करते हुए उनके पक्ष में नीतिया बनेंगी, के लिए लगातार कार्य करेगा.

v  पुनर्वास नीति के अनुसार हर विस्थापित किसान परिवार को जमीन के बदले जमीन व् न्युनतम 5 एकड़ जमीन दी जाये. सरकार प्रभावितों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार या तो निजी जमीन खरीद कर दे या विस्थापित को निजी जमीन खरीदने में मदद करे.

v  ओम्कारेश्वर परियोजना की भांति भूमिहीन परिवारों को 2.5 लाख रूपये का अनुदान दिया जाये.

v  बांध की डूब टापु में आने वाली जमीन व् मकान का अधिग्रहण कर विस्थापितों का पुनर्वास किया जाये. जिन व्यक्तियों की जमीने डूब गयी है परन्तु घर नहीं डूबे हैं उनके घरों के अधिग्रहण कर पुनर्वास किया जाये, इंदिरा सागर बांध प्रभावित 255 गावों में से अंतिम 41 गावों में बैक वाटर सर्वेक्षण कर डूब में आने वाले परिवारों का पुनर्वास किया जाये, अनेक गावों के लिए पुनर्वास स्थल नहीं बनाये गए है. उनका निर्माण कर विस्थापितों को पुनर्वासित किया जाये, गत वर्ष डूब में आयी जमीनों की फसलों की वास्तविक क्षतिपूर्ति दी जाये, बची हुई जमीनों पर पहुँचाने के लिए सड़क की व्यवस्था की जाये. भू-अर्जन व् पुनर्वास के अन्य सभी मुद्दों पर करवाई की जाये.

अपील

नर्मदा बचाओ आन्दोलन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत देश में इस लोकतंत्र को सजग, शक्तिशाली और सार्थक बनाने के लिए एवं अपने अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए अपील करता है कि सभी इन “लोक मंच” कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इन्हें सफल बनायें.

आलोक अग्रवाल, लक्ष्मीनारायण मीना, रामविलास राठौर, लोकेश, उत्तम पटेल, छोटूभाई

NBA opposes raising height of Narmada dam


‘No land to rehabilitate 2.5 lakh people in submergence zones’

The Narmada Bachao Andolan (NBA) has urged the central government to halt the mega Sardar Sarovar Project at its present height of 122 meters which will bring the requisite benefits without uprooting thousands of rural and tribal population from displacement.

During their two-day agitation that concluded at Jantar Mantar here on Thursday, representatives of the displaced families led by Medha Patkar knocked at the doors of Union Ministers Harish Rawat and Jairam Ramesh to get a hearing. Their common refrain was that the UPA government should not succumb to pressure from Gujarat Chief Minister Narendra Modi into allowing the dam to be raised to its final height, while 2.5 lakh people in 245 villages are still residing in submergence zones and there is no land to rehabilitate them.

The Narmada Control Authority (NAC) under the Ministry of Water Resources oversees the compliance of the Narmada Water Disputes Tribunal award by the basin States of Gujarat, Maharashtra and Madhya Pradesh.

Writer Arundhati Roy, activist Annie Raja and Manoranjan Mohanty were several prominent citizens who visited the dharna site at Jantar Mantar to express solidarity.

“If the government is unable to rehabilitate and resettle the thousands of project affected people, then the dam should not be raised any further,” NBA leader Medha Patkar told the authorities.

The dam is at a height of 122 meters and Mr. Modi wants the Centre to give permission to raise it to the full height of 138 meters. Resettlement of project affected people and environmental compliances have to be done six months ahead of raising the dam’s level in stages. Ms. Patkar said there should be a comprehensive review of the costs and benefits, environmental procedures and rehabilitation and resettlement of people.

‘MODI SEEKING TO GAIN POLITICAL BENEFIT’

The Staus Report of the NAC) of December 2012, says that the irrigation potential created by the dam is about 5 lakh hectares, but, Ms. Patkar said “the actual irrigation is only to the tune of 1.14 lakh hectares mainly because the Modi government has been focusing attention on raising the height of the dam and gaining political benefit without completing the canal network.”

“Although the project got the largest Central funding (Rs. 5,736 crore) under the Accelerated Irrigation Benefit Programme), less than 30 per cent of the canal network has only been laid in 30 years. Even so, the Gujarat government has decided to de-notify 4 lakh hectares from the project command area to reserve it for SEZs and other corporates. This is a major change in the master plan and for this alone, besides other non-compliances, the Centre should comprehensively review the project,” she told journalists.

Struggling for more than 25 years to get proper rehabilitation as prescribed under the award, the uprooted families ask only one question: “If there is no land with the government to give us after submerging ours, why is it continuing with the mega project? We are being asked to sacrifice our lands, our homes and our lives for whose benefit?’’

Ms. Patkar demanded that the NAC should conduct an independent review of the project.

The Hindu

web. http://www.thehindu.com/news/national/nba-opposes-raising-height-of-narmada-dam/article5248925.ece

Narmada Ghaati warns against increasing height of Dam


Review the Sardar Sarovar project | Rehabilitate 48,000 families 

Medha Patkar and oustees protest at Water Resources Ministry, challenge the illegal SSP and its canal network in irrigated villages! 

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New Delhi: Hundreds of Sardar Sarovar oustees stormed the national capital today and addressed the country from the streets of Jantar Mantar on the issue that affects lives of more than 2.5 lakh farmers, adivasis, fish workers, landless, boatsmen, potters etc in the Narmada valley and the socio-economic and environmental interests of Madhya Pradesh, Maharashtra and Gujarat. Reacting to Gujarat Chief Minister Narendra Modi’s call for a rally in the Narmada Valley seeking an immediate increase in the height of the dam, over 300 people affected by the dam project protested the Gujarat government’s plan and warned the Central government against such a move.

The final decision on the controversial Sardar Sarovar is most critical not just from the angle of the valley, but for its implications on the country. The Sardar Sarovar Project is symbolic of the flawed development paradigm adopted in post-independent India which has resulted in huge costs and minimal benefits. The country is prompted to re-think this path of ‘development’ which can only come at the cost of lives and livelihoods of lakhs of people in the valley.

About 100 people protested outside the Ministry of Water Resources, which leads the Narmada Control Authority and has falsely declared the remaining families to be rehabilitated in the three states as ‘zero’. Leading the protest, Medha Patkar questioned, “When 48,000 families are yet to be rehabilitated with alternative land and livelihood, when the expert committees of MoEF have exposed serious non-compliance on numerous environmental issues, when costs and benefits are in complete doldrums, when the present Grievance Redress Authority of Madhya Pradesh and Maharashtra have not consented to the increase in dam height, when the report of the judicial commission inquiring  into the Rs. 1,000 crore corruption scam in Madhya Pradesh is yet to come out, how and why should the height of Sardar Sarovar be increased further, illegally submerging the lives and livelihoods of lakhs, thousands of hecatres of land, villages communities and rich cultural heritage?

The oustees have been compelled to reach Delhi, and challenge not just the Ministry of Water Resources, Ministry of Social Justice and Ministry of Environment, but the Prime Minister himself, who promised the Supreme Court in 2006 that that dam will not be pushed ahead, without the lawful rehabilitation of all the affected families. After 28 years of peaceful struggle on multiple fronts, the oustees organized as Narmada Bachao Andolan, one of the largest peaceful social movements in the country, have exposed the saga of ‘costs’ that has increased 10 times and ‘benefits’ of the Project that is barely 10%. “The dam must be reviewed and all the people must be rehabilitated”, the oustees demanded in a single voice.

Playing up to the upcoming 2014 General Elections, the Gujarat and Madhya Pradesh governments are pushing for this destructive Sardar Sarovar Project which is beneficial only to a few private corporations. The most recent decision to ‘de-notify’ 4 lakh hectares of land from the command area is a complete fraud and deviates from the original project plan. This, especially in the light of the increased project costs, must be reviewed by the Planning Commission.

As of today, there are more than 48,000 families living in the 245 hilly adivasi and thickly-populated plain villages of the submergence area. Although an intense struggle has led to the historic retreat of the World Bank and land-based rehabilitation of 11,000 families in Gujarat and Maharashtra, thousands of other families remain to receive various entitlements such as cultivable land and house plots in resettlement sites, alternative livelihood for the landless, fishing rights in the reservoir, land for potters. Despite the huge losses that Madhya Pradesh and Maharashtra will incur, the people of the two states do not have rights to a drop of water from the reservoir or ‘free’ electricity.

In such a situation any act that pushes for further submergence in the valley is completely illegal, warned the oustees. The oustees, mostly poor dalits, tribals, and fish workers, have already faced severe impacts of water release from the upstream dams in the valley in 2013 and 2012, leading to destruction of thousands of hectares of land and houses of more than 1,000 families. Over the past 2 months, hundreds of oustees stormed the Collectors, Tehsildars, NVDA and NCA before reaching Delhi to demand ‘compensation’ for the submerged crops and properties, a measure already directed by the GRA, but not yet executed by the state government!

The policy of encashment, pushed forward by the Madhya Pradesh government in the last decade, has bred a huge scandal of corruption amounting to more than Rs. 1000 crore. With thousands of fake land registries, irregularities in declaration of oustees, house plot allotment and construction work at resettlement sites the matter is under inquiry by the Justice Jha Commission.

Hundreds of farmers and adivasis, affected by the massive network of the Indira Sagar and Omkareshwar canals also protested destruction of fertile and irrigated agricultural land in the Nimad region of Madhya Pradesh. The people demand that the Government review its plan to acquire and excavate canals in the villages that are already irrigated or are affected by the SSP and Maheshwar reservoir. They also questioned the severe impacts on crop losses caused due to water logging, muck disposal and non-implementation of the necessary command area development works. The people demand compensation for the same along with land-based rehabilitation for all families as per the Orders of the Supreme Court.

Khema and Rajbai, speaking on behalf of the adivasis affected by the Jobat Dam in the Alirajpur district of Madhya Pradesh, stated that even after a decade of illegal submergence, they have not yet been given alternative land. “The state government’s actions are in serve contempt of the orders of the High Courts and Supreme Court.”

The oustees warned the authorities and Central Government not to succumb to the pressure of the Government of Gujarat and violate the rights of the oustees guaranteed by the Narmada Tribunal, State Policies, Action Plans and Judgements of the Supreme Court.

For more information please contact 09212587159 | 09179148973

Narmada-Bachao-Andolan-accused-of-obstructing-power-project


hydal_b-16-02-2012Private sector Shree Maheshwar Hydel Power Corporation (SMHPC) on Thursday blamed Narmada Bachao Andolan (NBA) over inflation of costs and delay in taking off its hydro power project in Madhya Pradesh.

SMHPC is a private sector 400 MW run-off-the-river project on the river Narmada, located at Mandleshwar in Khargone district.

“It is only because of the wrong tactics adopted by the NBA that the cost of the Maheshwar Hydel Power Project doubled up from Rs 2000 crore to Rs 4000 crore,” the company Vice-Chairman Mukul Kasliawal said during an interaction with journalists.

NBA did not want any development to take place and had spurned all offers made by us in rehabilitating, he said.

“Time has come to find out who is financing the NBA and who is behind its move to delay construction of the Maheshwar power project,” Kasliwal said, adding had the NBA not created hurdles, the project which was started 18 years ago would have been completed a long time ago.

“The NBA now exists only in the press note it issues regularly in New Delhi and sometimes in Bhopal,” Kasliwal said.

When asked about why the company did not counter the NBA earlier, he said, “It was our job to complete the project and not react to all the trash that the NBA is in the habit of saying”.

Dam oustees want CM to meet them and fulfill demands


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Protesters staging ‘Jalsatyagaraha’ in three districts of Madhya Pradesh against non-fulfilment of their demands, on Friday, asserted they will not give up their agitation till Chief Minister Shivraj Singh Chouhan visits them and resolves the issues raised by them. The oustees of Indira Sagar Project (ISP), built on river Narmada near here, are staging `Jalsatyagraha’ at Badkhalia, Unwa and Mel Pipalia in Khandwa, Harda and Dewas districts, respectively since the last 12 days under the banner of Narmada Bachao Andolan (NBA). The protesters, who are standing in water as part of their stir, said if ruling BJP wants to win from these areas in the upcoming Assembly polls, then Chouhan must visit them and assure to fulfil their demands. Dam oustees want CM to meet them and fulfil demands However, sources in the administration said the Chouhan Government is unlikely to make any promise to the project-affected people ahead of the polls. Once the model code of conduct for Assembly polls comes into the force, the Government would not be able to do anything regarding their demands, they said. The protesters are demanding adequate compensation, land in lieu of land acquired for the project and a commitment to not to raise the dam’s water level above 260 meters. At present, the water level in ISP, a multi-purpose dam in Khandwa district, is 262.13 meters, which has resulted in submergence of large tracts of land in the area. Sukma Bai and Leela Bai, who are part of the water protest, said unless Chouhan visits them to resolve their problems, they will not give up their agitation. Meanwhile, NBA leader Alok Agrawal said since the protesters are in water for almost two weeks now, their skin has got damaged and developed wounds, from which blood is oozing out. 

Jal Satyagraha Continues In Several Villages


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After hearing an application filed by the Narmada Bachao Andolan regarding the people affected by the Indira Sagar Project, the Supreme Court on Friday ordered the NBA to present all the problems related to rehabilitation of people affected by the Indira Sagar Project within a week and ordered the State Government to submit a report to the court regarding the same. The next hearing is scheduled for September 23. Senior advocates, Dr Rajiv Dhavan and Mr Gaurav Agrawal presented the case on behalf of the NBA to the bench consisting of SC judges Mr B.S. Chauhan and Mr Bobade.

High Court Extends the final date of the Omkareswara Package to 30th September

On the other hand, a bench consisting of the acting Chief Justice of Jabalpur High Court – Mr K.K. Lahoti and Mr Kakade ruled on the NBA petition on behalf of the people affected by Omkareswara Dam and ordered that the last date for the 225 crore package be extended from September 8 to September 30. Senior advocate Ms Shobha Menon represented the NBA at the High Court.

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Police sent to arrest Malud Satyagrahis return empty handed

A large contingent of police personnel was sent to arrest Satyagrahies at the ongoing Jal Satyagraha at Malud village in the Khandwa district. When they arrived, more than 400 men and women descended into the water and walked deeper and deeper – forcing the police to return empty handed.

Fresh Jal Satyagraha in Nandana and Hanifabad Tola villages

Fresh Jal Satyagrah has begun in Nandana village in Khandwa district and Hanifabad Tola village in Harada district. Affected persons from nearby villages joined the jal satyagrah in large numbers by descending into the waters.

Satyagraha continues at Mel Pipaliya

The Jal Satyagraha at Mel Pipaliya village in Dewas District, which began on September 1, continues unabated. The 67 Satyagrahis who were arrested there earlier were released on Thursday. They rejoined the movement on Friday with twice the zeal.

Despite the release orders for Chittaroopa Palit and 6 others, the authorities have deliberately filed a case under article 188. They will now have to appear before the Chhanera Court on Saturday.

Jal-satyagrahis undeterred, complain of fever, skin disorders


 The jal satyagrahis, who claim to have remained continuously in water since nine days, started complaining about high fever, feet numbness and skin infections. However, they are not willing to call off their agitation against increase in the Indira Sagar dam water level.

“Though many satyagrahis are complaining about irritation and cracks in their feet, the numbers of protesters taking to water is going up by the day,” said Narmada Bachao Andolan’s (NBA) Alok Agrawal.

Lachokra villagers too have joined the agitation. “After the dam water-level was increased to 262 feet, more than 25 houses in Lachokra villages have submerged,” said Agrawal.

Local leaders are visiting the protesters. “They have assured us that they would take up the issue of the displaced villagers with the chief minister,” said Alok Agrawal.

In Mel-Pipliya village in Dewas district , seven couples are staging the protest. “The state government has not been abiding by the orders of Supreme Court on rehabilitation of dam-displaced people,” Agrawal added.